हनुमान-चालीसा
[आकार-२०x३०, पृष्ठ-१६, मूल्य- १० रूपये]

अब तक सभी मनुष्य तुलसीदास कृत वह हनुमान-चालीसा ही पढ़ते और सुनते आए हैं, जिनमें अनेक असम्भव एवं कपोल-कल्पित बातें लिखी हैं। अज्ञान में फँसें हुए नर-नारी उन गप्पों को भी सत्य मानते रहे हैं। आचार्य श्री डॉ० वेदप्रकाश ने हनुमान-चालीसा पुस्तक में महावीर हनुमान जी के सम्बन्ध में प्रचलित मिथ्या बातों के स्थान पर, उनके महान चरित्र को सत्य रूप में तथा दोहा और चैपाई-छन्दों में बहुत सरल और सुन्दर भाषा में लिखा है, जिसे पढ़कार और सुनकर आप आनन्द-विभोर हो जाएँगे।